general knowledge rajasthan 2017 in hindi pdf geography

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General knowledge rajasthan 2017 प्रश्न 1. राजस्थान की प्रमुख नदियों का विवरण दीजिए।
उत्तर किसी भी प्रदेश के आर्थिक, सांस्कृतिक विकास में नदियों का स्थान महत्वपूर्ण है। अतीत में सभ्यताओं के विकास में नदियों का विशेष महत्व रहा है। विश्व की अधिकांश सभ्यताएं इन नदियों के तटों पर पनपी हैं। महान भारतीय जल विभाजक रेखा राजस्थान को दो भागों में बांटती है। राजस्थान अपवाह तंत्र का 60.2 प्रतिशत भाग आन्तरिक प्रवाह प्रणाली में आता है। जिससे वर्षा के अभाव में अधिकांश नदियां बरसाती हैं।
बंगालकी खाड़ी में गिरने वाली नदियां-
(1)चम्बलनदी- चम्बलउसकी सहायक नदियों का कुल अपवाह क्षेत्र राजस्थान के कुल अपवाह क्षेत्र का 20.29 प्रतिशत है। यह राज्य की वर्षभर बहने वाली प्रमुख नदी है। चम्बल को कामधेनु, चर्मण्वती के नाम से भी जाना जाता है। इसका उद्गम मध्यप्रदेश में जानापाव पहाड़ियों से होता है। चौैरासीगढ़ के समीप राजस्थान में प्रवेश करती है। राज्य के चित्तौड़गढ़, कोटा, बूंदी, सवाई माधोपुर, करौली, धौलपुर जिलों में बहती हुई उत्तरप्रदेश के इटावा के समीप यमुना नदी में मिलती है। भैंसरोडगढ़ के समीप चूलिया प्रमुख जलप्रपात है। इस नदी पर गांधीसागर, राणाप्रताप सागर, जवाहर सागर, कोटा बैराज बांध बनाए गए हैं। बनास, काली-सिंध, पार्वती, बामनी, कुराल आदि चम्बल की सहायक नदियां हैं।
(2) बनास-राजसंमदके कुम्भलगढ़-गोगुन्दा में खमनौर की पहाड़ियों में उद्गम होता है। इसे 'वन की आशा' के नाम से जाना जाता है। सवाई माधोपुर में रामेश्वर स्थान पर यह चम्बल में मिलती है। बेड़च, कोठारी, मैनाल, मांसी, मोरेल, बाण्डी, ढंढ, खारी, चान्नेरी सहायक नदियां हैं। बींगोद में बनास, बेड़च, मेनाल का त्रिवेणी संगम हैं। टोंक में इस पर बीसलपुर बांध बना है।
(3) बेड़च-गोगुन्दाकी पहाड़ियों से निकलकर उदयसागर झील में गिरती है। इसका नाम आयड़ नदी है। 190 किमी बहने के बाद बींगोद के पास बनास में मिलती है।
(4) कोठारीनदी- राजसमंदमें देवगढ़ के पास दिवेर से निकलती हैं, लम्बाई 145 किमी है। इस पर मेजा बांध बनाया गया है। भीलवाड़ा में बनास से मिलती है।
(5) कालीसिंध नदी- मध्यप्रदेश(देवास) से प्रवाहित होकर राजस्थान के झालावाड़, कोटा में नानेरा स्थान पर चम्बल नदी में मिलती है। परवन, निवाज, आहू सहायक नदियां हैं। अन्य नदियों में खारी, पार्वती, परवन, निवाज है।
अरबसागर में जल ले जाने वाली नदियां-
(1)लूणीनदी- अजमेरके नाग पहाड़ से निकलकर राज्य के जोधपुर, बाड़मेर, जालौर में बहती हुई, गुजरात में प्रवेश कर कच्छ की खाड़ी मंे गिरती है। इसकी लम्बाई 330 कि.मी. है।
(2) माहीनदी- मध्यप्रदेशके अमरोरू पहाड़ियों से निकलकर डूंगरपुर-बांसवाड़ा से बहते हुए, खम्भात की खाड़ी में गिरती है। यह कर्क रेखा को दो बार काटती है।
(3) साबरमतीनदी- उदयपुरकी पहाड़ियों से प्रवाहित होकर खम्भात की खाड़ी में गिरती है।
(4) पश्चिमीबनास- अरावलीके पश्चिमी पहाड़ी से निकलकर, सिरोही से प्रवाहित होती हुई अन्त में कच्छ की खाड़ी (गुजरात) में गिरती है अन्य नदियां सोम, जाखम साबरमती आदि।
आंतरिकप्रवाह वाली नदियां-
(1)घग्घरनदी- हिमाचलप्रदेश की शिवालिक पहाड़ी से निकलकर, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान के हनुमानगढ़ में भटनेर के पास लुप्त हो जाती हैं।
(2) कान्तलीनदी- सीकरकी खण्डेला पहाड़ियों से निकलकर झुंझुनूं में बहती हुई चूरू की सीमा पर रेगिस्तान में विलीन हो जाती है।
(3) काकनेयनदी- इसेमसूरदी भी कहते हैं। जैसलमेर के कोटरी गांव से निकलकर थोड़ी दूरी पर स्थित बुझ झील में गिरती है। साबी, मेन्धा एवं रूपनगढ़ अन्य आंतरिक प्रवाह नदियां हंै।

प्रश्न2. राजस्थान में जनसंख्या की वर्तमान स्थिति का उल्लेख करते हुए जनसंख्या वृद्धि के कारण बताइए?
उत्तर वर्ष2011 की जनगणनानुसार राजस्थान की जनसंख्या 68548437 व्यक्ति है। यह भारत की कुल जनसंख्या की 5.8 % हैं। भारत में जनसंख्या की दृष्टि से राज्य आठवें स्थान पर है। 2001-2011 के दशक में भारत में जनसंख्या वृद्धि 17.64 % की तुलना में राजस्थान में 21.33 प्रतिशत रहा है।
राजस्थानमें जनसंख्या वृद्धि के कारण
बाल-विवाह- प्राचीकाल से ही राज्य में बाल-विवाह की कुप्रथा चली रही है। छोटी उम्र में विवाह हो जाने पर नासमझी में बच्चे हो जाते हैं जनसंख्या बढ़ती है।
गरीबीनिम्न जीवन स्तर-गरीबी कीभयावहता के कारण छोटी उम्र के बच्चों को रोजगार में लगा दिया जाता है। यह मानसिकता अधिक संतान पैदा करने को प्रोत्साहित करती है।
शिक्षाका अभाव- साक्षरतामें राजस्थान पिछड़ा है। महिला साक्षरता और ग्रामीण साक्षरता की स्थिति शोचनीय है। इसी कारण व्यक्ति अपने परिवार, समाज और देश के प्रति सचेत नहीं रहते हैं।
गर्मजलवायु- राजस्थानकी जलवायु ऊष्ण कटिबंधीय है उसमें भी कम वर्षा के कारण अधिक गर्म रहता है, फलस्वरूप गर्म जलवायु से मनुष्य में जल्दी परिपक्वता जाती है। वे छोटी उम्र में सन्तान पैदा करने में समर्थ हो जाते हैं जिससे जनसंख्या बढ़ती है।
संयुक्तपरिवार प्रथा- राज्यसंयुक्त परिवार प्रथा के चलते छोटे बच्चों की देखभाल का कार्य वृद्ध सदस्य करते हैं। दंपती को देखभाल की जरूरत नहीं होती जिससे जनसंख्या वृद्धि भार उनकी मानसिकता के परे रहता है।
आर्थिकपिछड़ापन- आर्थिकविकास के साथ जनसंख्या वृद्धि दर घटती है। राजस्थान आर्थिक रूप से पिछड़ा है। अतः यहां कच्ची बस्तियों एवं दूर-दराज के गांवों में मनोरंजन के साधनों की कमी, प्रेरक तत्वों से दूर है।
परिवारनियोजन कार्यक्रम की विफलता- प्रदेशकी जनता की अज्ञानता, अधिक जनसंख्या के दुष्परिणाम से अनभिज्ञता, भाग्यवादिता, अंधविश्वास के कारण सरकारी प्रयास विफल रहे हंै।
जन्मदर मृत्यु दर में अंतर- राज्यमें जन्म 28.6 प्रति हजार जबकि मृत्यु दर 7.0 प्रति 1000 है। मृत्यु दर को आदर्श स्थिति तक लाने में कामयाबी मिली, लेकिन जन्म दर अब ऊंची है जो जनसंख्या वृद्धि का कारण है। राज्य में शादीशुदा महिलाओं का ऊंचा अनुपात, विवाह की कम आयु,दंपती सुरक्षा दर नीचा पाया जाना ऊंची जन्म दर के उत्तरदायी कारण हैं। 

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